अब 10 से 15 दिसंबर तक होंगी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं: नई समय-सारणी जारी

उत्तर प्रदेश में कक्षा एक से आठवीं तक होने वाली अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घोषणा सामने आई है। राज्य के परिषदीय और मान्यता प्राप्त सभी स्कूलों में परीक्षा तिथियों में बदलाव करते हुए शिक्षा विभाग ने नई समय-सारणी जारी कर दी है। पहले ये परीक्षाएं नवंबर के अंतिम सप्ताह में निर्धारित थीं, लेकिन निर्वाचन कार्यों की वजह से इन्हें आगे बढ़ाना पड़ा। नई तिथियां छात्रों और स्कूलों दोनों के लिए अधिक अनुकूल मानी जा रही हैं, ताकि परीक्षा संचालन बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।

शिक्षा विभाग का कहना है कि प्रदेशभर के अनेक शिक्षक इन दिनों निर्वाचक नामावलियों के विशेष पुनरीक्षण अभियान में बूथ लेवल अधिकारी के रूप में ड्यूटी निभा रहे हैं। ऐसे में नवंबर के अंतिम सप्ताह में परीक्षाओं का संचालन चुनौतीपूर्ण हो सकता था। इस परिस्थिति को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने परीक्षाओं को दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक स्थगित करने का निर्णय लिया, जिससे शिक्षकों को दोनों जिम्मेदारियों का निर्वहन सुचारू रूप से करने का अवसर मिल सके।

अब 10 से 15 दिसंबर तक होंगी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं: नई समय-सारणी जारी
अब 10 से 15 दिसंबर तक होंगी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं: नई समय-सारणी जारी

नई घोषित तिथि-सारणी और परीक्षा का समय

नई समय-सारणी के अनुसार अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 10 दिसंबर से 15 दिसंबर 2025 के बीच आयोजित होंगी। परीक्षाएं रोज़ दो पालियों में संपन्न होंगी। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 12:30 बजे से 2:30 बजे तक चलेगी। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा से जुड़े अन्य सभी दिशा-निर्देश पूर्ववत रहेंगे और केवल तिथियों में ही संशोधन किया गया है। इससे स्कूलों और अभिभावकों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयारी करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।

विषयवार परीक्षा कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी

नई तिथि-सारणी के तहत 10 दिसंबर को सभी कक्षाओं की मौखिक परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसी दिन छात्रों की सह-शैक्षिक गतिविधियों जैसे शारीरिक शिक्षा, स्काउटिंग, खेल, बेसिक क्राफ्ट और स्वास्थ्य शिक्षा का मूल्यांकन भी किया जाएगा। 11 दिसंबर को गणित, विज्ञान, हिंदी और संस्कृत/उर्दू की मुख्य लिखित परीक्षा होगी। इसके बाद 12 दिसंबर को हिंदी, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और संस्कृत/उर्दू की परीक्षाएं संपन्न होंगी। 13 दिसंबर को विज्ञान, कला, संगीत, सामाजिक अध्ययन और गणित की परीक्षा आयोजित की गई है। अंतिम दिन यानी 15 दिसंबर को कार्यानुभव, नैतिक शिक्षा, पर्यावरण अध्ययन और हिंदी विषय की परीक्षा होगी।

बदलाव के पीछे प्रशासनिक कारण और इसका प्रभाव

परीक्षाओं की नई तिथियां तय करने के पीछे सबसे प्रमुख कारण चुनावी कार्यों के दौरान शिक्षकों की गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियाँ हैं। बूथ लेवल अधिकारी के रूप में लगाए गए शिक्षक यदि परीक्षाओं के दौरान व्यस्त रहते, तो परीक्षा संचालन प्रभावित हो सकता था। इस संशोधन से छात्रों को अतिरिक्त समय का लाभ भी मिलेगा। शिक्षकों को भी पढ़ाई और परीक्षा तैयारियों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने में सहूलियत होगी। स्कूल अब अपने रिवीजन सेशन को नए समय के अनुसार व्यवस्थित कर रहे हैं, जिससे छात्रों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

छात्रों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

परीक्षा तिथियों में बदलाव के बाद छात्रों को अपनी दिनचर्या और अध्ययन योजना को नई समय-सारणी के हिसाब से तैयार करना चाहिए। सुबह और दोपहर की दोनों पालियों के लिए उचित तैयारी और स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है। कई स्कूलों ने आधिकारिक नोटिस बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अद्यतन जानकारी साझा करनी शुरू कर दी है। अभिभावकों को विद्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचनाओं पर नजर बनाए रखनी चाहिए। साथ ही परीक्षा से संबंधित दिशा-निर्देशों के लिए छात्र बेसिक शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट भी देख सकते हैं।

परीक्षाओं के लिए तैयारी और आवश्यक संसाधन

अगर छात्र उत्कृष्ट प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो उन्हें स्कूलों द्वारा उपलब्ध कराए गए अभ्यास पुस्तकों, मॉडल पेपर, और अतिरिक्त अध्ययन सामग्री का उपयोग करना चाहिए। शिक्षकों द्वारा संचालित रिवीजन कक्षाओं में नियमित रूप से उपस्थित रहना परीक्षा की तैयारी को और मजबूत बना सकता है। परीक्षाओं से संबंधित किसी भी परिवर्तन की जानकारी आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त करना ही उचित है, ताकि कोई भ्रम न हो।

निष्कर्ष: नई तिथियां छात्रों और स्कूल दोनों के लिए अनुकूल

अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं की नई तिथि-सारणी छात्रों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती है। अतिरिक्त समय मिलने से तैयारी बेहतर होगी और स्कूलों के लिए भी परीक्षा संचालन अधिक सुचारू रहेगा। शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि संशोधित तिथियों के बावजूद परीक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कमी न आने पाए। पारदर्शी और निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए सभी आवश्यक कदम समय पर उठाए जाएंगे।

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