भारत की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती संस्थाओं में से एक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि अब उसकी सभी भर्ती परीक्षाओं में उम्मीदवारों की पहचान परीक्षा केंद्र पर चेहरे की पहचान (Face Recognition Technology) के माध्यम से की जाएगी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य परीक्षा में होने वाली नकल, फर्जी उम्मीदवारों और पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी को पूरी तरह रोकना है।
अब तक परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए एडमिट कार्ड, फोटो पहचान पत्र और मैनुअल जांच जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाती थीं। हालांकि, बढ़ती तकनीकी चुनौतियों और धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए UPSC ने आधुनिक तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया है, जिससे परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ और निष्पक्ष बन सके।
AI-सक्षम फेस रिकग्निशन से कैसे बदलेगी परीक्षा व्यवस्था
UPSC द्वारा लागू की जा रही यह प्रणाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) पर आधारित है। इसके तहत परीक्षा केंद्र पर उम्मीदवार के चेहरे की लाइव इमेज को उसके ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में अपलोड की गई फोटो से डिजिटल रूप से मिलाया जाएगा। यदि दोनों का मिलान सही पाया जाता है, तभी उम्मीदवार को परीक्षा कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड होती है और इसमें मानवीय हस्तक्षेप बहुत कम रहता है। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि किसी भी प्रकार की गलती या पक्षपात की संभावना भी घट जाती है। UPSC का मानना है कि यह बदलाव परीक्षा की विश्वसनीयता को एक नए स्तर पर ले जाएगा।
पायलट प्रोजेक्ट में साबित हुई तकनीक की सफलता
UPSC ने इस नई प्रणाली को सीधे सभी परीक्षाओं में लागू करने से पहले इसका परीक्षण किया। आयोग ने NDA और NA (द्वितीय) परीक्षा 2025 और CDS (द्वितीय) परीक्षा 2025 के दौरान एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया। यह परीक्षण गुरुग्राम के कुछ चुनिंदा परीक्षा केंद्रों पर किया गया, जहां हजारों उम्मीदवारों की पहचान फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए की गई।
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान यह देखा गया कि उम्मीदवारों के सत्यापन में लगने वाला समय काफी कम हो गया। जहां पहले एक उम्मीदवार के सत्यापन में अधिक समय लगता था, वहीं नई प्रणाली के तहत औसतन 8 से 10 सेकंड में पहचान पूरी हो गई। इससे प्रवेश प्रक्रिया तेज हुई और परीक्षा केंद्रों पर भीड़ प्रबंधन में भी काफी मदद मिली।
UPSC अध्यक्ष का बयान और आयोग का दृष्टिकोण
UPSC अध्यक्ष अजय कुमार के अनुसार, यह तकनीक केवल समय बचाने का साधन नहीं है, बल्कि यह परीक्षा सुरक्षा की एक अतिरिक्त और मजबूत परत जोड़ती है। उन्होंने बताया कि फेस रिकग्निशन प्रणाली से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि परीक्षा वही व्यक्ति दे रहा है जिसने आवेदन किया है। इससे डमी उम्मीदवारों और संगठित नकल गिरोहों पर प्रभावी रोक लगेगी।
आयोग का यह भी मानना है कि भविष्य में अन्य उन्नत तकनीकों को भी परीक्षा प्रक्रिया में जोड़ा जा सकता है, ताकि भर्ती प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय बनी रहे।
सिविल सेवा परीक्षाओं पर क्या होगा असर
UPSC द्वारा आयोजित परीक्षाओं में सिविल सेवा परीक्षा सबसे प्रमुख मानी जाती है, जिसके माध्यम से IAS, IFS और IPS जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इन परीक्षाओं में हर साल लाखों उम्मीदवार शामिल होते हैं। फेस रिकग्निशन तकनीक के लागू होने से इन परीक्षाओं की निष्पक्षता और अधिक मजबूत होगी।
उम्मीदवारों के लिए भी यह एक सकारात्मक बदलाव है, क्योंकि इससे ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का भरोसा सिस्टम पर और बढ़ेगा। साथ ही, परीक्षा के दौरान अनावश्यक जांच या बार-बार दस्तावेज दिखाने जैसी परेशानियों से भी राहत मिलेगी।
उम्मीदवारों को क्या सावधानी रखनी चाहिए
नई व्यवस्था के तहत उम्मीदवारों के लिए यह बेहद जरूरी होगा कि वे ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरते समय अपनी स्पष्ट, हालिया और सही फोटो अपलोड करें। यदि आवेदन में दी गई फोटो और परीक्षा केंद्र पर चेहरे में पर्याप्त समानता नहीं पाई जाती है, तो सत्यापन में समस्या आ सकती है। इसलिए आवेदन प्रक्रिया के दौरान आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से जुड़ी सभी आधिकारिक सूचनाओं के लिए केवल UPSC की अधिकृत वेबसाइट पर ही भरोसा करें।